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हैदराबाद में दीपावली पूजा / लक्ष्मी-गणेश पूजन पंडित — ऑनलाइन बुक करें

दीपावली पूजा — कार्तिक मास की अमावस्या को सम्पन्न — सनातन धर्म में सर्वाधिक सार्वभौम रूप से अनुष्ठित गृह-पूजा है, वह रात्रि जब लक्ष्मी प्रत्येक गृह में विचरण करती हैं एवं अपने आगमन हेतु तैयार गृहों को आशीर्वाद देती हैं।

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हैदराबाद में दीपावली पूजा / लक्ष्मी-गणेश पूजन — सेवा क्षेत्र

हम हैदराबाद के हर मोहल्ले में सेवा देते हैं — HITEC सिटी, माधापुर, गाचीबोवली, कोंडापुर, कुकटपल्ली, मियापुर, बंजारा हिल्स, जुबली हिल्स, बेगमपेट, अमीरपेट, हिमायतनगर, खैरताबाद, मेहदीपटनम, तोलिचौकी, ओल्ड सिटी, चारमीनार, दिलसुखनगर, LB नगर, उप्पल, तारनाका, सिकंदराबाद कैंट, बोवेनपल्ली, अलवल, कोम्पल्ली, शमशाबाद, नागोले और आसपास के इलाके। पंडित उसी दिन या निर्धारित समय पर उपलब्ध हैं — आपकी पसंदीदा भाषा (तेलुगु, हिंदी या अंग्रेज़ी) में।

दीपावली पूजा / लक्ष्मी-गणेश पूजन के बारे में

दीपावली पूजा — कार्तिक मास की अमावस्या को सम्पन्न — सनातन धर्म में सर्वाधिक सार्वभौम रूप से अनुष्ठित गृह-पूजा है, वह रात्रि जब लक्ष्मी प्रत्येक गृह में विचरण करती हैं एवं अपने आगमन हेतु तैयार गृहों को आशीर्वाद देती हैं। पद्म पुराण, स्कन्द पुराण (वैष्णव खण्ड), ब्रह्म पुराण, एवं भविष्य पुराण दीपावली को अनेक पवित्र घटनाओं के सङ्गम के रूप में वर्णित करते हैं: श्रीराम का चौदह वर्ष के वनवास से अयोध्या लौटना (रामायण, युद्ध काण्ड); समुद्र-मन्थन से लक्ष्मी का प्रादुर्भाव एवं विष्णु से उनका विवाह; बलि चक्रवर्ती पर वामन का राज्याभिषेक; कृष्ण द्वारा नरकासुर का वध (नरक चतुर्दशी); एवं व्यापारी समुदायों हेतु नवीन वर्षारम्भ। पूजा का केन्द्रीय कर्म लक्ष्मी (धन) एवं गणेश (विघ्न-निवारण) का संयुक्त पूजन है — विघ्न-निवारण के बिना धन सम्भव नहीं, धन के बिना धर्म नहीं — तदुपरान्त सरस्वती (विद्या), कुबेर (कोष), एवं गृह-लेखा-बही अथवा व्यापारी-लेखा (व्यापारी समुदायों में चोपड़ा पूजा)।

कब करें

दीपावली पूजा कार्तिक अमावस्या को सम्पन्न होती है, कार्तिक मास की अमावस्या रात्रि (अक्तूबर-नवम्बर)। शुभ मुहूर्त अमावस्या के सायंकाल का प्रदोष काल (सूर्यास्त से लगभग तीन घण्टे पश्चात् तक) है, जब स्थिर लग्न (वृषभ, सिंह, वृश्चिक, अथवा कुम्भ) उदित हो — स्थिर लग्न लक्ष्मी की स्थापना के बाद उनकी गृह में स्थिरता सुनिश्चित करता है। अनेक पञ्चाङ्ग वर्ष-विशेष लक्ष्मी पूजा मुहूर्त एवं महालक्ष्मी पूजा मुहूर्त प्रकाशित करते हैं। पञ्च-दिवसीय दीपावली का अपना अनुक्रम है: धनतेरस (त्रयोदशी) स्वर्ण एवं गृह-पात्र क्रय हेतु; नरक चतुर्दशी (प्रातः) अभ्यङ्ग स्नान हेतु; लक्ष्मी पूजा (अमावस्या सायं) — केन्द्रीय अनुष्ठान; गोवर्धन पूजा (प्रतिपदा) अन्नकूट हेतु; भाई दूज (द्वितीया) भाई-बहन सम्बन्ध हेतु। गृह की मुख्य पूजा अमावस्या के सायंकाल हेतु सुरक्षित है, निर्धारित प्रदोष-स्थिर-लग्न मुहूर्त पर आरम्भ।

इस पूजा को क्यों करें

श्रद्धालु दीपावली पूजा आगामी वर्ष हेतु लक्ष्मी को गृह में औपचारिक रूप से आमन्त्रित करने हेतु करते हैं — पद्म पुराण में वर्णित वह रात्रि जब लक्ष्मी प्रत्येक गृह में विचरण करती हैं, एवं स्वच्छ, अलङ्कृत, पूजा हेतु तैयार गृह उनकी निरन्तर उपस्थिति प्राप्त करते हैं; अन्धकार में रहने वाले अथवा अप्रस्तुत गृह उपेक्षित रह जाते हैं। पूजा एक साथ अनेक प्रयोजन पूरे करती है: धन, समृद्धि, एवं वित्त-स्थिरता हेतु लक्ष्मी का आवाहन; व्यापार एवं व्यक्तिगत कार्यों में विघ्न-निवारण हेतु गणेश; निर्णयों में स्पष्टता एवं विद्या हेतु सरस्वती; कोष (बचत) हेतु कुबेर; वाणिज्य में शुद्धता एवं सत्यता हेतु लेखा-देवी (व्यापारी गृहों में)। यह अनेक व्यापारी समुदायों हेतु नवीन वर्ष का आरम्भ है — मारवाड़ी, गुजराती, एवं तेलुगु कोमटि परम्परागत रूप से पूर्व-वर्ष के लेखे बन्द कर नवीन बही खोलते हैं। आध्यात्मिक रूप से यह अन्धकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान, एवं अधर्म पर धर्म की विजय का उत्सव है — लक्ष्मी के सम्मान में लाखों दीप भारत एवं प्रवासी भारत भर में जलाये जाते हैं। परिवारों के लिए यह सम्मेलन, उपहार-दान, एवं पाँच दिनों तक फैले साझे भोज से बन्धन सुदृढ़ करता है।

पूजा कैसे होती है

अमावस्या प्रातः गृह को पूर्ण रूप से शुद्ध किया जाता है, प्रत्येक द्वार पर रङ्गोली से अलङ्कृत, आम्र-पत्र-तोरण एवं गेन्दा-मालाओं से सुसज्जित। पूजा-स्थल — सामान्यतः गृह-वेदी अथवा पूर्व अथवा उत्तर मुख विशेष कोना — पुष्पों से सजाया जाता है, लक्ष्मी-गणेश-सरस्वती मूर्तियाँ (अथवा छायाचित्र) स्थापित किये जाते हैं, एवं उनके पास कलश रखा जाता है। प्रदोष काल आते ही परिवार स्नान कर नूतन वस्त्र धारण कर एकत्र होता है। पुरोहित (अथवा परिवार ज्येष्ठ) आचमन, प्राणायाम, एवं अभिप्राय-घोषक सङ्कल्प सम्पन्न करते हैं। गणेश पूजा प्रथम — विघ्न-निवारण हेतु। पुण्याहवाचनम् से स्थल शुद्ध। कलश स्थापना सम्पन्न। महालक्ष्मी आवाहनम् — लक्ष्मी का रजत, स्वर्ण, अथवा ताम्र मुद्रा (केन्द्रीय यन्त्र) में आवाहन। षोडशोपचार पूजा — आवाहनम्, आसनम्, पाद्यम्, अर्घ्यम्, स्नानम्, वस्त्रम्, गन्धम्, पुष्पम्, धूपम्, दीपम्, नैवेद्यम्, ताम्बूलम्, प्रदक्षिणा, नमस्कार। श्री-सूक्तम्, लक्ष्मी अष्टोत्तरम्, एवं लक्ष्मी सहस्रनाम पाठ। चोपड़ा पूजा (लेखा-बही पूजन) यथा-स्थान। आरती — महालक्ष्मी आरती एवं ओम् जय लक्ष्मी माता। प्रत्येक कक्ष, द्वार, बालकनी, छत पर दीप जलाये जाते हैं — गृह दीप-समुद्र बन जाता है। प्रसाद, मिष्ठान, एवं उपहार वितरण से अनुष्ठान समाप्त। आतिशबाज़ी (जहाँ अनुमत हो) पारम्परिक रूप से अनुसरण।

लाभ

दीपावली पूजा सम्पूर्ण आगामी वर्ष में अनुगुञ्जित लाभ देती है। भौतिक रूप से लक्ष्मी को गृह में निवास हेतु आमन्त्रित करती है — धन, समृद्धि, वित्त-स्थिरता, एवं व्यापार/कार्य में वृद्धि लाती है। पद्म पुराण कहता है कि जिस गृह में दीपावली पूजा यथाविधि सम्पन्न होती है, वहाँ लक्ष्मी की निरन्तर उपस्थिति रहती है एवं वर्ष भर दरिद्रता का स्पर्श नहीं होता। आध्यात्मिक रूप से यह अन्धकार पर प्रकाश, भौतिकवाद के अज्ञान से धार्मिक समृद्धि के ज्ञान में आत्म-जागरण का शाश्वत उत्सव है। पारिवारिक रूप से विस्तृत परिवार को एकत्र लाती है — भाई-बहन, माता-पिता, सन्तानें, ससुराल — पाँच-दिवसीय उत्सव में निरन्तर सम्मेलन, उपहार-दान, साझे भोज, एवं सामूहिक पूजा से कुटुम्ब-बन्धन सुदृढ़। व्यापारी परिवारों हेतु यह नवीन वित्तीय वर्ष को लक्ष्मी के आशीर्वाद में औपचारिक रूप से खोलती है, परम्परागत रूप से वाणिज्य में समृद्धि लाती है। कार्मिक रूप से यह वर्ष-पुराने विघ्नों को विघटित करती है, नवीन उद्यमों का मार्ग खोलती है, एवं गृह-पुण्य का नवीनीकरण करती है। ज्योतिषीय रूप से स्थिर लग्न में रात्रि की पूजा लक्ष्मी की स्थिर, निरन्तर उपस्थिति सुनिश्चित करती है — अस्थिर भाग्य स्थायी समृद्धि में परिवर्तित। बच्चों को सांस्कृतिक संक्रमण का स्मरणीय अनुभव — गृह धार्मिक उत्सव की पाठशाला बनता है।

सामग्री सूची

लक्ष्मी-गणेश-सरस्वती मूर्तियाँ अथवा छायाचित्र, लाल अथवा पीले वस्त्र-आच्छादित स्वच्छ काष्ठ-पट पर। पीतल अथवा रजत मुद्रा (लक्ष्मी यन्त्र-प्रतीक)। रजत/ताम्र लक्ष्मी यन्त्र। आम्र-पत्र एवं नारियल सहित पीतल कलश। अक्षत, हल्दी, कुङ्कुम, चन्दन। सैकड़ों दीप (छोटे मिट्टी के तेल-दीप) — न्यूनतम 21, आदर्श 108 अथवा अधिक। दीप हेतु रुई-बत्ती, घी, एवं तेल। कर्पूर, अगरबत्ती, धूप। प्रत्येक द्वार पर रङ्गोली रङ्ग एवं चावल-आटा। द्वार-तोरणों हेतु आम्र-पत्र। गेन्दा-माला एवं गुलाब-माला। पुष्प — कमल (अनिवार्य), चमेली, गेन्दा, गुड़हल। पाँच फल (केला, आम, नारियल, अनार, सेब) सहित ऋतु-फल। मिष्ठान — लड्डू, बर्फी, पेड़ा, खीर, हलवा, बालूशाही। मेवे — बादाम, काजू, किशमिश, पिस्ते। पञ्चामृत, पञ्चगव्य। पाँच धान्य (चावल, गेहूँ, उड़द, मूँग, चना)। अनुष्ठान-अर्पण हेतु स्वर्ण/रजत मुद्रायें। नूतन लेखा-बही एवं लेखनी (व्यापारी गृहों में चोपड़ा पूजा हेतु)। समस्त परिजनों हेतु नूतन वस्त्र। पूजा-स्थल पर प्रतीकात्मक धन हेतु नकद एवं मुद्रायें। शङ्ख एवं घण्टा। प्रसाद हेतु सपथा भोग (रवा-घी-दूध-शक्कर-केला मिष्ठान्न)। आतिशबाज़ी (जहाँ अनुमत)। पुरोहित हेतु दक्षिणा-लिफ़ाफ़ा।

मंत्र और पाठ

गणपति अथर्वशीर्ष से अनुष्ठान आरम्भ। ऋग्वेद का श्री-सूक्तम् प्रमुख ग्रन्थ — लक्ष्मी की प्रशंसा में पन्द्रह श्लोकों का पाठ, प्रत्येक श्लोक के साथ एक अर्पण। लक्ष्मी अष्टोत्तर शत-नामावली (108 लक्ष्मी-नाम) कुङ्कुम-अर्पण के साथ चान्तित। समय अनुमति देने पर लक्ष्मी सहस्रनाम (1,000 नाम) पाठ। आदि शङ्कर का महालक्ष्मी स्तोत्र गायन। लक्ष्मी गायत्री मन्त्र जप। सरस्वती वन्दना, कुबेर स्तोत्र, एवं विष्णु सहस्रनाम संयुक्त। भाग्य सूक्त एवं श्री-सूक्तम् मिलकर लक्ष्मी का अष्ट-रूपों (अष्ट-लक्ष्मी) में आवाहन। मुख्य यजमान विशेष महालक्ष्मी बीज मन्त्र (श्रीं) का जप। आरती सर्वाधिक प्रचलित 'ओम् जय लक्ष्मी माता' हिन्दी में (पण्डित श्रद्धाराम फिल्लौरी द्वारा 19वीं शताब्दी में रचित परन्तु अब सार्वत्रिक प्रिय), तदुपरान्त गणेश आरती, सरस्वती आरती, कुबेर आरती। व्यापारी गृह विशेष चोपड़ा पूजा मन्त्र — विघ्नेश्वर का आवाहन नूतन लेखा-बही के आशीर्वाद हेतु।

क्षेत्रीय परंपराएँ

उत्तर भारतीय (पंजाबी, हिन्दी-पट्टी, मारवाड़ी) दीपावली लक्ष्मी-गणेश पर केन्द्रित — सायं विस्तृत लक्ष्मी पूजा, पूर्ण अन्नपूर्णा भोज (कुछ गृहों में छप्पन भोग), एवं भव्य आतिशबाज़ी। गुजराती दीपावली (बेस्तु वरस — नूतन वर्ष) विस्तृत चोपड़ा पूजा एवं नूतन लेखा-बही के उद्घाटन से नवीन व्यापार-वर्ष आरम्भ। दक्षिण भारतीय दीपावली (तमिल नाडु, आन्ध्र, कर्नाटक) नरक चतुर्दशी पर अधिक बल देती है (अमावस्या से पूर्व प्रातः) — प्रातः-काल का तेल-स्नान तदुपरान्त नरकासुर-पराजय हेतु कृष्ण-सत्यभामा पूजा। बङ्गाली काली पूजा लक्ष्मी-केन्द्र को प्रतिस्थापित करती है — इसी रात्रि महाकाली का विस्तृत ताण्त्रिक पूजन। महाराष्ट्रीय दीपावली पडवा (प्रतिपदा) तक विस्तरित — पति-पत्नी विनिमय। श्रीवैष्णव गृह तिरुमला-तिरुपति-दर्शन के साथ महालक्ष्मी-नारायण संयुक्त पूजा। माध्व परम्परा विशेष वासुदेव-लक्ष्मी अनुष्ठान सम्मिलित। जैन दीपावली महावीर के निर्वाण की स्मृति। सिख बन्दी छोड़ दिवस (गुरु हरगोबिन्द की मुक्ति) दीपावली के साथ। प्रवासी रूपान्तर स्थानीय समय अनुसार अनुष्ठान, परन्तु प्रदोष-स्थिर-लग्न सिद्धान्त सुरक्षित।

मूल्य को क्या प्रभावित करता है?

मूल्य निर्भर करता है (क) पैमाने पर — अल्प गृह-मात्र लक्ष्मी पूजा (60-90 मिनट) बनाम सहस्रनाम एवं श्री-सूक्तम् के साथ पूर्ण महालक्ष्मी पूजा (2-3 घण्टे) बनाम चोपड़ा पूजा, श्री-सूक्तम् होम, एवं पूर्ण सपथा भोग के साथ विस्तृत दीपावली पूजा (4-5 घण्टे); (ख) पुरोहित-संख्या — गृह हेतु 1, व्यापार अथवा विस्तृत गृह हेतु 2-3; (ग) सामग्री — मूल किट बनाम रजत/स्वर्ण यन्त्र, 108 दीप, पूर्ण मिष्ठान एवं मेवा संग्रह, सपथा भोग, पञ्चगव्य, पञ्चामृत सहित पूर्ण पारम्परिक किट (अधिकतम परिवर्तनीय कारक); (घ) सजावट — मूल पूजा-स्टैण्ड बनाम रङ्गोली कलाकार, गेन्दा-मालायें, लटकती दीप-व्यवस्थायें, पुष्प-मण्डप के साथ पूर्ण दीपावली सजावट (₹3,000-50,000); (ङ) आतिशबाज़ी (जहाँ अनुमत) — मध्यम संग्रह (₹2,000-5,000) बनाम विस्तृत प्रदर्शन (₹15,000-80,000); (च) पुरोहित एवं आमन्त्रित ब्राह्मणों हेतु ब्राह्मण-भोजनम्; (छ) परिजनों एवं पड़ोसियों को वितरण हेतु मिष्ठान एवं मेवे (₹3,000-25,000); (ज) मुहूर्त-परामर्श (अल्प, प्रायः निःशुल्क); (झ) दक्षिणा-लिफ़ाफ़ा एवं वस्त्र, पीतल-पात्र, एवं भोज्य का दान। व्यापारी गृह चोपड़ा पूजा सामग्री जोड़ते हैं (नूतन लेखा-बही, लेखनी, कवर सजावट, ₹500-3,000)। प्रवासी गृह सामुदायिक दीपावली कार्यक्रम के साथ व्यय बाँटते हैं। प्रीमियम सेवा में पूजा हेतु पारम्परिक वादक (सितार, हारमोनियम) सम्मिलित (₹5,000-15,000)।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दीपावली पूजा / लक्ष्मी-गणेश पूजन हैदराबाद में में कितना समय लगता है?

पूरी पूजा आमतौर पर 1.5 से 3 घंटे लेती है — विस्तृत या संक्षिप्त विधि के अनुसार। अमावस्या प्रातः गृह को पूर्ण रूप से शुद्ध किया जाता है, प्रत्येक द्वार पर रङ्गोली से अलङ्कृत, आम्र-पत्र-तोरण एवं गेन्दा-मालाओं से सुसज्जित।

क्या पंडित जी सामग्री लाते हैं?

आप दो विकल्प चुन सकते हैं — सामग्री खुद की व्यवस्था करें, या पंडित जी से थोड़ा अतिरिक्त शुल्क लेकर लाने को कहें। लक्ष्मी-गणेश-सरस्वती मूर्तियाँ अथवा छायाचित्र, लाल अथवा पीले वस्त्र-आच्छादित स्वच्छ काष्ठ-पट पर।

puja4all.com पर दीपावली पूजा / लक्ष्मी-गणेश पूजन का मूल्य कैसे तय होता है?

puja4all.com पर आप केवल ₹101 का फ्लैट प्लेटफॉर्म शुल्क देते हैं — पंडित को 100% फीस मिलती है। पंडित की फीस अवधि, सामग्री शामिल या नहीं, भाषा और दूरी पर निर्भर करती है। मूल्य निर्भर करता है (क) पैमाने पर — अल्प गृह-मात्र लक्ष्मी पूजा (60-90 मिनट) बनाम सहस्रनाम एवं श्री-सूक्तम् के साथ पूर्ण महालक्ष्मी पूजा (2-3 घण्टे) बनाम चोपड़ा पूजा, श्री-सूक्तम् होम, एवं पूर्ण सपथा भोग के साथ विस्तृत दीपावली पूजा (4-5…

क्या मैं तेलुगु, हिंदी या अंग्रेज़ी में पंडित बुक कर सकता हूँ?

हाँ। puja4all.com पर हर पंडित जी का प्रोफाइल यह बताता है कि वे किन भाषाओं में पूजा करते हैं — तेलुगु, हिंदी, अंग्रेज़ी, और कई पंडित तमिल, कन्नड़, मराठी और बंगाली में भी। बुकिंग के समय अपनी पसंदीदा भाषा चुनें।

हैदराबाद में दीपावली पूजा / लक्ष्मी-गणेश पूजन कितनी जल्दी बुक हो सकती है?

हैदराबाद में अधिकांश पूजाओं के लिए उसी दिन की बुकिंग संभव है (पंडित की उपलब्धता पर निर्भर)। पसंदीदा मुहूर्त सुरक्षित करने के लिए कम-से-कम 24 घंटे पहले बुकिंग की सलाह दी जाती है। गृह प्रवेश और विवाह के लिए 7–14 दिन पहले बुकिंग करें।

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