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हैदराबाद में मकर संक्रान्ति / पोङ्गल पूजा पंडित — ऑनलाइन बुक करें

पोङ्गल/मकर सङ्क्रान्ति हिन्दू पञ्चाङ्ग का सर्वोच्च सौर पर्व है, जो उस दिवस पर आचरित होता है जब सूर्य धनु से मकर में सङ्क्रमण करते हैं — मकर-सङ्क्रान्ति — दक्षिणायन के अन्त एवं उत्तरायण के उषा-काल का प्रतीक, वह शुभ उत्तर-दिशा सौर यात्रा जब…

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हैदराबाद और सिकंदराबाद में उपलब्ध

हैदराबाद में मकर संक्रान्ति / पोङ्गल पूजा — सेवा क्षेत्र

हम हैदराबाद के हर मोहल्ले में सेवा देते हैं — HITEC सिटी, माधापुर, गाचीबोवली, कोंडापुर, कुकटपल्ली, मियापुर, बंजारा हिल्स, जुबली हिल्स, बेगमपेट, अमीरपेट, हिमायतनगर, खैरताबाद, मेहदीपटनम, तोलिचौकी, ओल्ड सिटी, चारमीनार, दिलसुखनगर, LB नगर, उप्पल, तारनाका, सिकंदराबाद कैंट, बोवेनपल्ली, अलवल, कोम्पल्ली, शमशाबाद, नागोले और आसपास के इलाके। पंडित उसी दिन या निर्धारित समय पर उपलब्ध हैं — आपकी पसंदीदा भाषा (तेलुगु, हिंदी या अंग्रेज़ी) में।

मकर संक्रान्ति / पोङ्गल पूजा के बारे में

पोङ्गल/मकर सङ्क्रान्ति हिन्दू पञ्चाङ्ग का सर्वोच्च सौर पर्व है, जो उस दिवस पर आचरित होता है जब सूर्य धनु से मकर में सङ्क्रमण करते हैं — मकर-सङ्क्रान्ति — दक्षिणायन के अन्त एवं उत्तरायण के उषा-काल का प्रतीक, वह शुभ उत्तर-दिशा सौर यात्रा जब देवगण जागृत हैं एवं मानवीय शुभ-कर्म अधिकतम फल देते हैं। महाभारत के भीष्म-पर्व में अङ्कित है कि भीष्म पितामह ने इसी क्षण को अपने देह-त्याग हेतु चुना, अट्ठावन रात्रियाँ शर-शय्या पर सहन कर उत्तरायण-मार्ग द्वारा ब्रह्म-लोक प्राप्त करने हेतु। पर्व के अनेक क्षेत्रीय नाम हैं: तमिलनाडु में पोङ्गल, आन्ध्र-तेलङ्गाना में सङ्क्रान्ति, पञ्जाब में लोहड़ी, असम में माघ-बिहू, गुजरात में उत्तरायण, बिहार में खिचड़ी, हिमाचल में माघी — परन्तु क्षेत्रीय रङ्ग के अधोभाग में मूलभूत तिथि एवं सूर्य-अर्घ्य समरूप हैं। सार्वभौम आचार: मकर के प्रथम सूर्योदय पर सूर्य-नमस्कार, तिल-गुड़ वितरण, सङ्गम पर माघ-स्नान, गोशाला-पूजा, पितृ-तर्पण, दान, एवं ताजे धान्य से 'पोङ्गल' का मिट्टी-चूल्हे पर पकना — उबाल-कर बहने पर शुभ गर्जन 'पोङ्गलो पोङ्गल्!' से उत्सव। यह दिन पूर्व-सौर-स्थिति के अशुभ प्रभावों को विराम देता है एवं नवीन सौर-आशीर्वादित उद्यमों का शुभारम्भ करता है।

कब करें

पूजा मकर-सङ्क्रमण दिवस पर सम्पन्न होती है — पञ्चाङ्ग द्वारा परिकलित सूक्ष्म सौर-सङ्क्रमण, अधिकांश वर्षों में १४ जनवरी। सर्वाधिक अनुष्ठानिक काल पुण्य-काल है — सङ्क्रमण-क्षण के पूर्व एवं उपरान्त छह घण्टे, जिनमें सर्वाधिक प्रबल ९६ मिनट सङ्क्रमण के तत्क्षण उपरान्त। पुण्य-काल में दान, स्नान, जप एवं तर्पण साधारण दिवसों के समतुल्य कर्मों के कोटि-गुणित पुण्य देते हैं। तमिल पोङ्गल चक्र सङ्क्रान्ति से एक दिन पूर्व भोगी-पोङ्गल से प्रारम्भ, सूर्य-पोङ्गल से चलते हुए मट्टु-पोङ्गल से होते हुए काणुम्-पोङ्गल पर समाप्त। आन्ध्र-तेलङ्गाना चक्र भोगी-सङ्क्रान्ति-कनुमा-मुक्कनुमा से समानान्तर। वार्षिक पुनरावृत्ति परम्परा। मकर सङ्क्रान्ति के स्वयं के पुण्य-काल में पूजा अन्य किसी दिवस की तुल्य पूजा से कहीं अधिक प्रबल है; स्कन्द पुराण इसे सहस्र साधारण-दिवस पूजाओं के समान घोषित करता है।

इस पूजा को क्यों करें

सैद्धान्तिक आधार वैदिक-पौराणिक उपदेश पर प्रतिष्ठित है कि सूर्य प्रत्यक्ष-ब्रह्म हैं — दृश्य ब्रह्म जिनकी दैनिक यात्रा काल को मापती है। दक्षिणायन देवों की रात्रि एवं पितृ-मार्ग; उत्तरायण देवों का दिवस एवं देव-मार्ग। मकर सङ्क्रान्ति वह सूक्ष्म देहली-क्षण है जब वैश्विक चक्र मुड़ता है। इस तिथि पर पूजा करने से गृहस्थ का वर्षारम्भ वैश्विक अयन-आरम्भ से सङ्गत होता है। स्कन्द पुराण घोषणा करता है: 'सङ्क्रान्त्यां यद् दानं जपं तपस्तत् सर्वम् अक्षयम्' — सङ्क्रान्ति पर किया गया कोई भी दान, जप या तप अक्षय हो जाता है। पर्व आगामी वर्ष हेतु जन्म-कुण्डली में सूर्य की भी शान्ति करता है — दुश्स्थान में या नीच में स्थित सूर्य वालों को विशेष लाभ। तिल-गुड़-विनिमय वर्ष-संचित वाणी-कलहों को विघटित करता कहा गया।

पूजा कैसे होती है

गृहस्थ ब्रह्म-मुहूर्त से पूर्व उठ कर तिल-तैल अभ्यङ्ग-स्नान सम्पन्न करते हैं। पण्डितजी सूर्योदय पर सामग्री सहित पधार कर स्वच्छ चौकी पर सूर्य-मण्डल स्थापित करते हैं। सङ्कल्प स्पष्ट कर लिया जाता है। गणेश-पूजा एवं कलश-पूजा पूर्ववर्ती; तदनन्तर मुख्य सूर्य-षोडशोपचार आदित्य-हृदयम् पाठ सहित आरम्भ। सूर्य-अर्घ्य तीन बार अर्पित — सूर्योदय, माध्याह्न एवं सूर्यास्त पर। पारम्परिक पोङ्गल-पाकशन सम्पन्न: ताजा चावल, दुग्ध, गुड़, घृत एवं इलायची आँगन में काष्ठ-अग्नि पर मृत्तिका-घट में पकाये जाते हैं, परिवार 'पोङ्गलो पोङ्गल्!' का उद्घोष करता है जब दुग्ध उमड़ कर बहता है — आगामी वर्ष की समृद्धि का अतिप्रवाह-प्रतीक। पञ्चामृत एवं आदित्य-हृदयम् मन्त्र से सूर्य-यन्त्र अभिषेक उपरान्त चक्करा-पोङ्गली, वड़ा, पायसम् एवं वेण्-पोङ्गल नैवेद्य अर्पण। तिल-गुड़ कुटुम्ब-सदस्यों में वितरित। अगले दिन मट्टु-पोङ्गल/कनुमा गो-पूजा।

लाभ

पूजा करने से सम्पूर्ण आगामी वर्ष हेतु सूर्य-महादेव का अनुग्रह सुनिश्चित होता है — सूर्य ग्रह-राज हैं जिनकी कृपा कुण्डली के विशाल विविध दोषों को सुधारती है। दुश्स्थान (६, ८, १२) में या नीच में स्थित सूर्य वालों को विशेष लाभ। पूजा आरोग्य, राज्य, प्रतिष्ठा, पितृ-अनुग्रह एवं शत्रु-शान्ति सुनिश्चित करती है। आदित्य-हृदयम् पाठ रामायण में अजेयता प्रदान करता कहा गया। मट्टु-पोङ्गल द्वारा सञ्चित गोशाला-पूजा कोटि गो-पुण्य उत्पन्न करती है। तिल-गुड़ वितरण वर्ष-संचित वाक्-पाप विघटित करता है। पुण्य-काल में दिया गया दान सहस्र-गुणित होता है। इन दिनों सङ्गम पर माघ-स्नान अनेक जन्मों के संचित-पाप धोता है। श्रद्धापूर्वक पूजा से मृत्यु-काल पर उत्तरायण-शुभ-देह-त्याग प्राप्त होता है।

सामग्री सूची

आवश्यक सामग्री सूर्य-यन्त्र या सूर्य-विग्रह से प्रारम्भ। आँगन में रङ्गोली से बनाया सूर्य-नमस्कार मण्डल। पीतल या रजत आम्र-पल्लव-नारिकेल-कलश। नवीन-धान्य चावल, दुग्ध, गुड़, घृत, इलायची, काजू, किशमिश चक्करा-पोङ्गली हेतु। पोङ्गल-पाक हेतु मृत्तिका-घट — ताजा, नवीन। पोङ्गल-अग्नि हेतु काष्ठ। तिल-गुड़ निर्माणार्थ तिल, गुड़, मूँगफली, भुनी चना। चन्दन-लेप, कुङ्कुम, अक्षत, शुद्ध घृत। रक्त, नारङ्गी एवं पीत पुष्प। नैवेद्य: चक्करा-पोङ्गली, वेण्-पोङ्गल, वड़ा, पायसम्, ताजे फल विशेषतः गन्ना, केला, अनार, तिल-लड्डू, गुड़-लड्डू। सूर्य-विग्रह हेतु नवीन वस्त्र, परम्परानुसार पीत या केसरी। मट्टु-पोङ्गल हेतु गो-अलङ्करण सेट: हल्दी-लेप, कुङ्कुम, मालाएँ, सींग-रङ्ग, मिश्री-गोल। प्रातः तर्पण हेतु पितृ-तर्पण सेट। पण्डित-दक्षिणा, ब्राह्मण-भोजन।

मंत्र और पाठ

मुख्य सूर्य-मन्त्र सूर्य-गायत्री 'ॐ भास्कराय विद्महे महद्द्युतिकराय धीमहि तन्नो आदित्य प्रचोदयात्'। आदित्य-हृदयम् (वाल्मीकि रामायण, युद्ध-काण्ड १०७) आवश्यक एवं केन्द्रीय। सूर्य-अष्टोत्तर-शत-नामावली अर्चनार्थ पठित। महा-सङ्क्रान्ति-स्तुति 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः' सङ्क्रमण क्षण पर १०८ बार पठित। पुण्य-काल-स्नान मन्त्र 'सङ्क्रान्त्यां यद् दानं जपं तपस्तत् सर्वम् अक्षयम्' स्कन्द पुराण से। पितृ-तर्पण मन्त्र तिल-युक्त-जल सहित पठित। आदित्य-नमस्कार द्वादश नामों (मित्र, रवि, सूर्य, भानु, खग, पूष्ण, हिरण्यगर्भ, मरीचि, आदित्य, सवित्र, अर्क, भास्कर) सहित सूर्योदय पर सम्पन्न। 'ॐ सूर्याय शरणं मम' से समर्पण-समाप्ति।

क्षेत्रीय परंपराएँ

सरल गृह-सङ्क्रान्ति में एकल सूर्य-अर्घ्य, आदित्य-हृदयम् पाठ, चक्करा-पोङ्गली एवं तिल-गुड़ वितरण सम्मिलित — दो से तीन घण्टे। तमिल चतुर्दिवसीय पोङ्गल आचार: भोगी पर पुरानी वस्तुओं का दहन, सङ्क्रान्ति पर सूर्य-पूजा एवं पोङ्गल-निर्माण, तृतीय दिवस पर पूर्ण मट्टु-पोङ्गल-अलङ्करण सहित गो-पूजा, एवं काणुम् पर कुटुम्ब-भ्रमण। आन्ध्र-तेलङ्गाना सङ्क्रान्ति समान चतुर्दिवसीय चक्र पतङ्ग-उड़ान, गङ्गिरेड्डु-आट एवं हरिदासु-गीतों सहित। पञ्जाबी लोहड़ी शीत-अग्निकुण्ड एवं नृत्य पर बल। माघ-मेला तीर्थ-यात्रा प्रकार माघ-स्नान, मुण्डन-संस्कार एवं महा-तर्पण सहित — पूर्ण-दिवस। श्रीवैष्णव मन्दिर-सङ्क्रान्ति सूर्य-नारायण अभिषेक, अखण्ड-तिरुवायि-मोज़ी एवं वैकुण्ठ-दर्शन सहित।

मूल्य को क्या प्रभावित करता है?

(क) परिमाण — सरल गृह-पूजा रु.3,500 से रु.6,500; पूर्ण चतुर्दिवसीय तमिल पोङ्गल चक्र रु.12,000 से रु.22,000; १००८ आदित्य-हृदयम् सहित पूर्ण सूर्य-यज्ञ रु.35,000 से रु.65,000। (ख) पुरोहित-संख्या — गृह-पूजा एकल पण्डित; चतुर्दिवसीय द्वि-पण्डित दल; यज्ञ चार से छह पण्डित। (ग) सामग्री — नवीन मृत्तिका-घट रु.150-300, अग्नि-काष्ठ रु.400-1,000, ताजी-कटाई चावल रु.500-1,200, दुग्ध-गुड़-घृत बण्डल रु.1,500-3,500, तिल-गुड़ रु.600-1,500, गन्ना रु.400-800, गो-अलङ्करण सेट रु.800-2,000। (घ) स्थल — आँगन सरल; गोशाला-व्यवस्था यात्रा-शुल्क जोड़ती है। (ङ) ब्राह्मण-भोजन — प्रति ब्राह्मण रु.350-700। (च) ब्राह्मण-दक्षिणा — सङ्क्रान्ति पुण्य-काल पर प्रति ब्राह्मण रु.501-2,001। (छ) क्षेत्रीय भिन्नता — तमिलनाडु एवं आन्ध्र-तेलङ्गाना प्रीमियम। (ज) काल-खण्ड — पुण्य-काल बुकिंग 25-40% प्रीमियम।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मकर संक्रान्ति / पोङ्गल पूजा हैदराबाद में में कितना समय लगता है?

पूरी पूजा आमतौर पर 1.5 से 3 घंटे लेती है — विस्तृत या संक्षिप्त विधि के अनुसार। गृहस्थ ब्रह्म-मुहूर्त से पूर्व उठ कर तिल-तैल अभ्यङ्ग-स्नान सम्पन्न करते हैं।

क्या पंडित जी सामग्री लाते हैं?

आप दो विकल्प चुन सकते हैं — सामग्री खुद की व्यवस्था करें, या पंडित जी से थोड़ा अतिरिक्त शुल्क लेकर लाने को कहें। आवश्यक सामग्री सूर्य-यन्त्र या सूर्य-विग्रह से प्रारम्भ।

puja4all.com पर मकर संक्रान्ति / पोङ्गल पूजा का मूल्य कैसे तय होता है?

puja4all.com पर आप केवल ₹101 का फ्लैट प्लेटफॉर्म शुल्क देते हैं — पंडित को 100% फीस मिलती है। पंडित की फीस अवधि, सामग्री शामिल या नहीं, भाषा और दूरी पर निर्भर करती है। (क) परिमाण — सरल गृह-पूजा रु.3,500 से रु.6,500; पूर्ण चतुर्दिवसीय तमिल पोङ्गल चक्र रु.12,000 से रु.22,000; १००८ आदित्य-हृदयम् सहित पूर्ण सूर्य-यज्ञ रु.35,000 से रु.65,000।

क्या मैं तेलुगु, हिंदी या अंग्रेज़ी में पंडित बुक कर सकता हूँ?

हाँ। puja4all.com पर हर पंडित जी का प्रोफाइल यह बताता है कि वे किन भाषाओं में पूजा करते हैं — तेलुगु, हिंदी, अंग्रेज़ी, और कई पंडित तमिल, कन्नड़, मराठी और बंगाली में भी। बुकिंग के समय अपनी पसंदीदा भाषा चुनें।

हैदराबाद में मकर संक्रान्ति / पोङ्गल पूजा कितनी जल्दी बुक हो सकती है?

हैदराबाद में अधिकांश पूजाओं के लिए उसी दिन की बुकिंग संभव है (पंडित की उपलब्धता पर निर्भर)। पसंदीदा मुहूर्त सुरक्षित करने के लिए कम-से-कम 24 घंटे पहले बुकिंग की सलाह दी जाती है। गृह प्रवेश और विवाह के लिए 7–14 दिन पहले बुकिंग करें।

मकर संक्रान्ति / पोङ्गल पूजा हैदराबाद में बुक करने के लिए तैयार हैं?

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